अष्टिम्की पर्व एक परिचय – सेवेंद्र कुसुमया

हिन्दु धर्मके महान पर्वक नाउमे एकठो पर्व कृष्ण जन्मअष्टमीफे हो । यी पर्व कृष्ण भगवानके जन्मदिनके खुसियालीमे मना जाइत । यीही हमार थारु भाषमे अष्टीम्की कहिके कहिजाइत । हमार थारु जातिनके पुर्खौसे मनैती आइल अष्टीम्की तिहुवार एकठो थारु जातिनके महान तिहुवार नैे हो कहिके कहे नै सेक्जाइ यी तिहुवार फे थारु समाजमे पुर्खौसे चल्ती आइल चालचलन अनुसार खोब मजासे मना जाइत ।
द्धापर युगमे जलम लेहल भगवान श्री कृष्णके पुजा अष्टीम्की तिहुवार एकठो थारु समुदायम परापूर्वकालसे मनैना चलन आईल बा । बिशेष कर्के लँवर्या, जन्नी मनै ब्रत बैठना चलन फे बा । अष्टीम्कीक ब्रत बैठनासे आगेक रात दर खैना चलन बा रातके दर खैना ओरसे आघेक दिन अष्टीम्की रहुइया मनै रातके दर खैना कहिके मिठ मिठ टिना टावनके खोजीमे रठैँ जस्ते कोइ मच्छी मारे जाइ कोइ अपने बारी बेउँरामे रहल हरियर परियर सागपात खोज्ठैँ जेकर घरेम सिध्रा पक्ली रहत त ओहे तयार पर्ले रठैँ चहा जा जैसिन रलेसे लेकिन और दिनके तिना टावनसे मिठे खैना सोँच रठिनउहे दिनके बेरिजुन दिनेक खोजल टिना मजाके मरमसाला दारके तनिक तेलारे मेलारेके निहिनके कोरे भात टिना मुस,छुछरुन,बिलार,कुक्कुर ना खाइ पाइत कहिके देहरी,कुठलीक उँप्पर भरकनमे जैसिन सुरक्षित ठाउँमे मजाके टोपछोपके धर्ठै । दर मुर्गी बोल्ना जुनसे आगे खाईपर्ना पहिले पुर्खैसे चलनचल्ती बा । यदि खैहिबेर मुर्गी बोल्गीलेसे दुठेहरु हो जिना ब्रत बैठे नै बन्ना कना हमार पुर्खानके कहाइ बतिन । दर खैनाहे हमार थारु भाषमे भिन्सारे खैना कहिके फे कठैँ ।ओत्र कर्के बेरी खा पिके आपन घरक छिपल पाकल मनैन बुदु,बुदी,दाइ बाबान रातके दर खाइक लाग झत्ते झत्ते जगादेहो उठादेहो कहिके औरदिनीक लेके अंगत्ती सुतजैठैँ ।रातिक करिब १।२ बजेओर घरेक छिपलपाकल मनैनके हाँकके सँगे अथवा अप्नही उठके मुर्गी बोल्नासे पहिले दर खा दर्ठै । ओकर बिहानसे ब्रतके शुरुवात हुईत ब्रत बैठल मनै ऊ दिन झग्रा लराइ,पाप नै कर्ना कहाइ हुइलेक ओरसे ब्रत बैठल मनै धेर जसिन आपन आपन घरहीमे धकीया,गोँरी ,बेना बिनके नै त आउर घरही बैठके घरही कर्ना काम कर्के बैठल रठैँ । । ओस्तके हमार थारु समुदायम घरक भिताम कृष्ण भगवानके चित्र बनाके ओ पाँचु पान्डवनके चित्र श्रवण आपन दाइबाबा भरुवाम बोकल, रावण रुइना,रुख्वा,पञ्चकन्या डोलीसे लेके सक्कु चिजक चित्र बनाके ऊ चित्रमे सन्झाके पुजा कर्ना अष्टीम्की टिक्ना चलन बा । अष्टीम्की टिकबेर आपन थारु संस्कृतिक पहिरनम सँपरके गाउँक एकठो भल्मन्साक घरमे बनाइल चित्रमे टिक्ना चलन बा । सक्कुजाने टिकबेर टठियाम चाउर,चाउरम डिया बारके ओ फलफुलम खिरा, निमुवा,अम्रुट,केरा आदी इत्यादी लेक करजाइत अष्टीम्की टिकेबेर गीत फे गैना चलन बा ।
जाउ जाउ दुधकेचनिया धरतीक जावन लेहे जाउ
हरही गेँगती रे धरतीक जावन लेहे जाउ

टिकके सेकलेसे चोँटी कत्ना लवन्डा मनैरठ । ओ ब्रत बैठल मनै ऊ साँझके फलफुल पानी खाइ बनठ ऊ रात कृष्ण भगवानके खिष्शामे आधारित गीतबाँस गैना चलन बा ।

भोरे भैलागी नसरिया मुरुघियक बोले
उठो पुट बरु कन्हैया बछरु न छोरे…..२
जाउ तानी मैया री रे बछरु न छोरे पठाइ ते
मोरे लाग मैया री रे सोनकी पवलिया बन्वादे
सोनकी पवलिया रे पुट राजा घर बावइ
कठकी पवलिया हो पुट देहबु रे बनवाइ …..२
यी रजवइ ते मरबु री राजभंग करबु
सोनकी पवलिया हो मैया री मोरे लेहबु उठाइ……२
भोरे भैलागी नसरिया मुरुघीयक बोले
उठो पुट बरु कन्हैया बछरु न छोरे….२
जाउ तानी मैया री रे बछरु न छोरे पठाइके
मोरे लाग मैया री रे सोनकी टेरुनिया बन्वादे…२
सोनकी बँसुलिया पुट राजघर बावइ
बाँसकी बँसुलिया हो पुट री देहबु बनवाइ

अष्टीम्कीक खैना परिकारमे सिध्रा,खँरिया,फुलौरी,पोँइक टिना गुडा जसिन धेर परिकार बनाके तयार कर्ले रठाँ । बिहानके एकचो फेन अष्टीम्की टीकके, अष्टीम्कीक टीकल सक्कु लडियम अस्रैना काम हुइठ अस्राइबेर आपन दुख बेमार घरेम ना आइस खातीपुती ना आए कहिके बिच लडियक धारमे अस्राके घरेम आके गोबर पानीसे लिपपोट करके फ्रहार कर्ठ ओ फ्रहार करबेर सक्कु खैना चिज काह्रके तब खैना शुरु हुइठ, काह्रल चिज एकठो अग्रासन हो ऊ अग्रासन आपन दिदी बहिन्या, बेटिया, छाईन हे अग्रासन पहुरा बनाके देहे जैना चलन बा हमार थारु समुदायम ।

सेबेन्द्र कुसुम्या चौधरी
हसुलिया ८ कैलाली
ashtimkik

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